In a First, Man Treated for Facial Spasm Through Radio Frequency
15 साल से चेहरे की ऐंठन का इलाज उन्हें नहीं मिल रहा था। उनकी प्रफेशनल और पर्सनल जिंदगी भी खराब हो रही थी। मेडिकली इसे हेमीफेशल ऐंठन की बीमारी कहा जाता है। वह सर्जरी कराना नहीं चाहते थे। डॉक्टरों ने बिना सर्जरी उन्हें ठीक कर दिया।
बच्चों के डॉक्टर खुद की बीमारी से परेशान थे। 15 साल से चेहरे की ऐंठन का इलाज उन्हें नहीं मिल रहा था। उनकी प्रफेशनल और पर्सनल जिंदगी भी खराब हो रही थी। मेडिकली इसे हेमीफेशल ऐंठन की बीमारी कहा जाता है। ब्रेन सर्जरी से इसका इलाज संभव है, लेकिन वह सर्जरी कराना नहीं चाहते थे। दिल्ली के डॉक्टरों ने उनकी इस बीमारी का इलाज बिना सर्जरी के किया। पहली बार रेडियो फ्रीक्वेंसी से सफल इलाज किया गया, अब वह पूरी तरह फिट हैं।
इस बारे में केएएस मेडिकल सेंटर और मेडस्पा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजय कश्यप ने कहा कि हेमीफेशल ऐंठन नर्व सिस्टम की समस्या से होती है। इसमें रोगी को मुंह के एक तरफ की मांसपेशियों में झटका या ऐंठन महसूस होती है। इसकी वजह ब्लड वेसल्स का मुंह के नर्व के साथ संपर्क होना है। इस प्रक्रिया में डिस्टर्ब नर्व का पता लगाने के लिए नर्व स्टिमुलेटर का इस्तेमाल करते हैं। पता लगने के बाद बहुत ही ध्यान से रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए इसे स्थायी तौर पर खत्म कर दिया जाता है। इसका मतलब है कि बिना सर्जरी किए समस्या को जड़ से खत्म कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया की मदद से लंबे समय तक आराम मिलता है और इसमें कोई खास रिस्क भी नहीं होता।
डॉ. कश्यप ने बताया कि इस प्रक्रिया को बहुत ही सरल तरीके से अंजाम तक पहुंचाया गया, जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। मरीज खुद डॉक्टर हैं, लेकिन 15 साल से वह इस समस्या से जूझ रहे थे। लगातार ऐंठन से वह अपनी एक आंख तक नहीं खोल पाते थे। इस प्रक्रिया के बाद से अब वह आसानी से फेशियल कंट्रोल कर पाते हैं।
मरीज ने कहा, 'मैंने इसके इलाज के लिए बोटॉक्स का भी सहारा लिया लेकिन यह भी काम नहीं किया। जैसे ही बोटॉक्स का प्रभाव खत्म होने लगा समस्या वापस आने लगी और इस वजह से मैंने किसी भी तरह के फंक्शन या सोशल इवेंट में जाना बंद कर दिया। मैं हर किसी को अपनी समस्या नहीं बता सकता था। कुछ न्यूरोसर्जन की सलाह के बावजूद मैं ओपन ब्रेन सर्जरी कराने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहा था।'
डॉक्टर का दावा है कि इस बीमारी में यह प्रसीजर देश ही नहीं दुनिया में पहली बार किया गया है। डॉक्टर ने कहा कि भारत में हेमीफेशल का इलाज भी काफी मुश्किल है। अब इलाज की नई तकनीक आने से मरीजों को फायदा मिलेगा और वह फिर से सामान्य जीवन बिता पाएंगे।
मरीज ने कहा, 'मैंने इसके इलाज के लिए बोटॉक्स का भी सहारा लिया लेकिन यह भी काम नहीं किया। जैसे ही बोटॉक्स का प्रभाव खत्म होने लगा समस्या वापस आने लगी और इस वजह से मैंने किसी भी तरह के फंक्शन या सोशल इवेंट में जाना बंद कर दिया। मैं हर किसी को अपनी समस्या नहीं बता सकता था। कुछ न्यूरोसर्जन की सलाह के बावजूद मैं ओपन ब्रेन सर्जरी कराने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहा था।'
डॉक्टर का दावा है कि इस बीमारी में यह प्रसीजर देश ही नहीं दुनिया में पहली बार किया गया है। डॉक्टर ने कहा कि भारत में हेमीफेशल का इलाज भी काफी मुश्किल है। अब इलाज की नई तकनीक आने से मरीजों को फायदा मिलेगा और वह फिर से सामान्य जीवन बिता पाएंगे।
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